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In Conversation with Swami Shailendra

This is our discussion with Guru ji, Swami Shailendra on various topics.

Why work if Meditation gives you ultimate happiness ?

Guru dev please keep guiding us

This is just a beginning, I would be posting many such conversation with Swami ji.
(Both in  Hindi and English)
 प्रश्न..
गुरुदेव कल से एक सवाल मन में घूम रहा है , आप कृपया मार्ग दिखाएं …आपने कल कहा कि खुशी , आनंद या हैप्पीनेस भीतरी या इंटरनल होती है । मैं इस बात को मानता हूं,  क्योंकि हम किसी भी एक परिस्थिति में अलग-अलग समय पर अलग-अलग तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं और एक ही परिस्थिति में कभी खुश होते हैं और कभी नहीं होते हैं. यह तो समझ में आता है कि यह जो कुछ भी है भीतरी या  इंटरनल हे। जब आप यह कहते हैं कि यही खुशी आपको ध्यान से प्राप्त  और महसूस हो जाती है , तो कहीं इससे यह तो नहीं होगा कि जो व्यक्ति व्यवसाय  करता है  या प्रोफेशनल वर्ल्ड में  रोज प्रतिस्पर्धा करता है   वह व्यक्ति ध्यान से  इस खुशी को प्राप्त कर के और क्योंकि  यही खुशी तो उसका लक्ष्य या अल्टीमेट गोल है , बाकी के काम छोड़ देगा?
स्वामी जी कहते हैं…
अगर आपको उड़ना आ जाए,  मान लीजिए आप जहां बैठे हैं वहीं बैठे बैठे ऊपर उठ जाएं आसमान में तो खुशी होगी कि नहीं ? बहुत खुशी होगी फिर आप रोज-रोज ऊपर उठोगे,  जितनी देर चाहो उपर रह सकते हो आगे पीछे हो सकते हो । लेकिन फिर आपको ऐसा लगेगा कि अरे थोड़ा अौर उपर जाकर देखते हैं , थोड़ा उधर जाकर देखते हैं , थोड़ा इधर जाकर देखते हैं , दूर-दूर घूम के आते हैं , तो ध्यान में तो वो खुशी ऐसी होती है की एक ही जगह पर आप ऊपर उठ गए और फिर वह खुशी डायनामिक होना चाहती है अपने आप ही फिर हम चाहते हैं कि यह काम करते हुए भी वह खुशी रहे , वह काम करते हुए  खुशी रहे तो इंफेक्ट और ज्यादा आपको डायनामिक काम करने की इच्छा होने लगेगी तो इसी तरह से  हे ये । ध्यान की खुशी तो ऐसे हैं जेसे आप समुद्र हो गए , जब आप समुद्र हो गए तो समुद्र को तो मजा आता है खूब लहराने में , फिर वो लहराए बिना रह नहीं सकता ,  शुरु में तो खुद लहर है जब तक तब तक वो परेशान है,  कि समुद्र मेरे को इधर से उधर फेंक रहा है, तो वो चाहता है कि कुछ शांति हो जाए और जब वह शांत होकर खुद समुद्र बन जाता है तब वह कहता है कि अरे खूब लहराओ , तो फिर जो एक्टिविटी हो रही है वह मेरे कारण हो रही है अभी जो एक्टिविटी हो रही है वह मजबूरी में मुझको करनी पड़ रही है और तब मैं एक्टिविटी का सोर्स होता  हूं,  इसलिए उस में मजा आता है बस इतना सा फर्क है …..  फिर तो एक्टिविटी का कोई अंत नहीं है जितना ज्यादा वह घूमेगा उतना ज्यादा मजा आएगा ।  सेटिस्फेक्शन का कभी अंत होता नहीं  तो जिसको उड़ना आ गया हो तो फिर वह रुकता नहीं  कभी वह अमेरिका जाएगा कभी दूसरे ग्रहों में जाएगा और  चलता चला जाएगा उसको इसमें आनंद आएगा क्योंकि कोई रुकावट नहीं है अगर वह पैदल चलेगा या चल रहा है तो उसको थोड़ी देर में थकान महसूस होगी और वह थक कर बैठ जाएगा पर जब किसी भी काम करने में थकावट होनी बंद हो जाए तो वो स्थिति बहुत मजेदार है उसको आप  जीवन मुक्ति  भी कह सकते हैं और इस स्थिति में आदमी मुक्त है किसी भी एक्टिविटी के परिणाम और प्रोसेस से भी मुक्त है ऐसी स्थिति में वह कुछ भी काम कर लेता है वह डरेगा नहीं… कुछ भी कर जाएगा लोगों को शायद लग सकता है कि वह कोई बहुत मुश्किल काम कर रहा है या बहुत आसान काम कर रहा है लेकिन उसको हर काम में इतनी खुशी मिलेगी कि वह सरलता से करता चला जाएगा
Question :
gurudev there is a question in mind, please show the way … you said that happiness or bliss is within or   inner /  internal state . I completely agree to this . This is the reason we react differently in the same situation at different time . In same situation, sometimes we are happy and may be at some other time we are not so happy. So I agree that it is internal and within.  My question is for the people who are in business or who are in competitive professional world. I believe our ultimate goal of life is happiness, which is  internal and as you say can be achieved by Meditation , then  … don’t you think a person after achieving this state of  mind by meditating, will stop working further ?
Answer :
Swamiji say …
Suppose you know how to fly,  now imagine a situation, where you  gradually started elevating from your seat towards sky …..will you be happy  ?  yes certainly you will be happy and exited. Then off course you will like to try it everyday and eventually exploring all the possibilities while flying , like moving ahead, looking back and so on on . While exploring all these, the day will come, when you will try to travel beyond, to go to different places , to go as far as possible,  to look something new , to explore something new. This is what happens when you experience the happiness or bliss after meditation. Moment you elevate from the place where you were sitting, the happiness wants to be dynamic, it wants to explore the world and move around. This happiness makes you dynamic and eventually you want to explore different things in the everlasting state of happiness.
Happiness achieved by meditation is just like imagining your self  a ocean. Being an ocean it will be your personality and nature to flow unlimited. Earlier when you were just a wave you feel that you’ve been thrown around the sea,  just for nothing.  You feel bad about it and wish for peace and calmness ….  this state of peace  and calmness ultimately converts struggling waves into the ocean. Now it is his nature to generate waves  and flow unlimited, so much so it forgets that at some point  he was just a wave. All the activities now are his activities, earlier  the activities were out of compulsion and now he  become the source of activity …. “this is the basic difference”. Once you’ve learnt flying and started enjoying the same you don’t want to stop…. one day you wish to go to America and next day you will like to go to other planet. These activities will be endless, you will enjoy doing it and sky will be the the limit. In this state you will try to explore more, you will not stop and this will be everlasting.  You feel happiness and bliss in the entire journey.
This  journey will continue forever because there is no friction  and you are flowing smoothly if you walk for a distance there are chances that you feel tired you want to  sit or stop. But when you are not tired or you do any work effortlessly with ultimate happiness then the activity become easy and you can do as many activity as possible. Working endlessly without tierdness is most amazing star of mind …  you feel free from all the strings. This is the state of  ” Jeevan-Mukti” .  A state where you are free from fear, process, result etc . This is a big strength,  this motivates you to do wonders and take risk . Above all you will feel happy while doing all this.
Jai guru dev